रिपोर्ट – by सुरेश सुन्देशा ( बालोतरा ) मो . 9950184152
जर्जर स्कूल में पढ़ने की है मजबूरी , कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा शौचालय व पीने का पानी छत पंखे नहीं है
बालोतरा (बाड़मेर ) – सरकार शिक्षा पर हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन इसके बाद भी बच्चों के शैक्षिक स्तर में सुधार नहीं हो पा रहा है। वहीं, प्राथमिक विद्यालयों की अपेक्षा निजी विद्यालयों में बच्चों की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है। कई स्थानों पर भवन जर्जर होने के कारण छात्रों को दूसरे विद्यालयों में जाकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रह रही है। सबसे ज्यादा खराब हालत बालोतरा उपखंड के हरिजन बस्ती मदन पेट्रोल पंप के पीछे राजकीय प्राथमिक विद्यालय वार्ड नंबर 22 में विद्यार्थियों को भारी सामना करना पड़ रहा है छत पंखे भी खराब पड़े हैं शौचालय की व्यवस्था नहीं है खुले में शौचालय करना पड़ रहा है पानी पीने की व्यवस्था नहीं हैं स्कूल का भवन जर्जर हालत में कभी भी बड़ा हादसा भी हो सकता है उपखण्ड़ में कई गाँवों में बने विद्यालयों के भवन जर्जर हैं।
इनमें से बहुत से स्थानों पर जर्जर भवनों की स्थिति बद से बदतर है लेकिन पुराने भवनों को गिराया नहीं जा सका है। इसके कारण हमेशा दुर्घटना का भय सताता रहता है। मीडिया टीम ने पहुंचकर हाल देखा तो विद्यालय में बने दो कमरे पूरी तरह क्षतिग्रस्त है जो हमेशा बड़े हादसे का न्यौता दे रहा है !
इसके कारण विद्यालय के बच्चे प्राथमिक विधालय भवन से बाहर खुले में बैठकर शिक्षण कार्य करते हैं। स्कूलों के भवन काफी जर्जर हो गए हैं। इसके चलते शिक्षकों और बच्चों को हमेशा दुर्घटना होने का भय सताता रहता है। कार्यवाहक अध्यापिका ने बताया की यह स्कूल का पुराना भवन जर्जर हो चुका है। जो हमेशा हादसा होने का डर सता रहा है!
लापरवाह विभाग :-
उपखड़ क्षेत्र के कई गाँवों में विधालय भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है स्कूल की छत टूट टूट कर गिरने लगी है कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका जिस कारण बच्चे डर के मारे में बैठकर पढ़ने को मजबूर गनीमत र शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता हुआ यह विद्यालय या यहाँ पढ़ने वाले बच्चों की जान विभाग के लिए कोई अहमियत नहीं रखते।
विधालय में बच्चे जर्जर भवन में भयभीत होकर पढ़ने को विवश हैं. भवन की हालत इतनी दयनीय है कि कभी भी ध्वस्त हो सकता है और किसी अनहोनी की घटना घट सकती है
इन्हीं टूटे कमरों में बच्चों की पढ़ाई की जा रही है. भवन की जर्जर स्थिति से बच्चे के अविभावक भी कसिी अनहोनी से भयभीत रहते हैं. वहीं शिक्षक भी भयभीत होकर बच्चों की पढ़ाई प्रतिदिन करते हैं.! वही कार्यरत शिक्षकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है. सबसे ज्यादा परेशनियों का सामना कार्यरत महिला शिक्षकों को डठानी पड़ रही है ! बच्चों को चेहत के लिहाजा विधालय के क्षतिग्रस्त बरामदे मे बिठाया जा रहा है!
1. – इनका कहना है ओमप्रकाश हरिजन ने कहा कि हमारे बच्चों को पढ़ने के लिए सरकार ने स्कूल तो खोल दिया लेकिन भवन को रिपेयर नहीं किया गया .25 वर्ष पुराने जर्जर भवन में बच्चे पढ़ते हैं कभी भी अप्रिय धटना धटने की आशंका बनी रहती है. हमलोग दृष्टि बच्चे को लेकर काफी भयभीत रहते हैं.
2.- इनका कहना है इंद्रा चौधरी अध्यापिका ने बताया कि मेरी ड्यूटी यहा नहीं थी मैंने ज्वाइन अभी की है ज्वाइन चार दिन हो गए हैं.
3 . – इनका कहना है दयाराम पटेल बीईईओ बालोतरा स्कूल के लिए पास में कोई जमीन नहीं है इसलिए कोई शौचालय नही बनाया हुआ है पानी का टांका नहीं बनाया जा सकता है इनके लिए प्रस्ताव भेजा हुआ है बजट पास होगा तब बनाया जाएगा.
4 .- इनका कहना है जिला कलेक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते ने बताया कि में अधिकारी को स्कूल में भेजता हूं मीडिया द्वारा मेरे को सूचना दी गई उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद !



