एक समान यूनिफॉर्म – अब हर बच्चा बराबर
शिक्षा मंत्री ने कहा –
“राज्य के सभी स्कूलों में एक जैसी ड्रेस लागू होगी, ताकि सामाजिक समानता का संदेश बच्चों में जाए।”
इस नए नियम के तहत अब टाई हटाई जाएगी, जिससे बच्चों को अधिक सुविधा रहेगी और माता-पिता पर आर्थिक बोझ भी घटेगा।
मदन दिलावर का मानना है कि “स्कूल की पहचान बच्चे के व्यवहार और संस्कार से होनी चाहिए, कपड़ों से नहीं।”
राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत रोज़ाना अनिवार्य
राज्य के स्कूलों, शिक्षा विभाग के कार्यालयों और पंचायती-राज संस्थानों में अब हर दिन की शुरुआत राष्ट्रगान से और दिन का समापन राष्ट्रगीत से किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि यह कदम राष्ट्रभक्ति और अनुशासन को बढ़ाने के लिए लिया गया है।
अब हर कर्मचारी की उपस्थिति राष्ट्रगान के समय दर्ज की जाएगी।
नया शैक्षणिक सत्र – अब हर साल 1 अप्रैल से
प्रदेश के सभी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र की शुरुआत अब 1 अप्रैल से होगी।
इससे बच्चों को समय पर पुस्तकें और तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
गर्मी की छुट्टियों और परीक्षाओं की तिथियाँ भी इस बदलाव के अनुसार तय की जाएँगी।
शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए आई-डी कार्ड अनिवार्य
अब सभी शिक्षकों और शिक्षा-विभागीय कर्मचारियों को आई-डी कार्ड पहनना अनिवार्य होगा।
मदन दिलावर ने कहा –
“यह व्यवस्था पारदर्शिता, सुरक्षा और अनुशासन को मजबूत करेगी। हर व्यक्ति की जिम्मेदारी अब पहचान के साथ होगी।”
शिक्षा का नया संस्कार – अनुशासन के साथ समानता
इन घोषणाओं के बाद प्रदेश में शिक्षा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
कई शिक्षा-विशेषज्ञों ने इस निर्णय को “संवेदनशील और समयानुकूल” बताया है।
माना जा रहा है कि इससे सरकारी-निजी स्कूलों का फर्क कम होगा और विद्यार्थियों में समानता व गौरव की भावना मजबूत होगी।
Samachar 360 विश्लेषण
“राजस्थान में शिक्षा सुधारों की यह श्रृंखला केवल नीतिगत नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत है।
एक समान यूनिफॉर्म बच्चों में समानता का भाव पैदा करेगी,
राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत से देशभक्ति को बल मिलेगा,
और समय पर सत्र से शिक्षा व्यवस्था अधिक अनुशासित बनेगी।”
