बच्चों में दिखा अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उत्साह
📍 मोदरान | 17-18 मई 2026
मोदरान स्थित श्री अणदेश्वर वाटिका में आयोजित चार दिवसीय “व्यक्तित्व विकास एवं संस्कार शिविर” का रविवार को महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 रविशरणानंद गिरी जी महाराज के सानिध्य में भव्य शुभारंभ हुआ। शिविर में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक एवं समाजसेवी पहुंचे।
शिविर के प्रथम दिन से ही विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति के प्रति विशेष उत्साह देखने को मिला। कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने पूरे जोश और अनुशासन के साथ भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा और जागरूकता का परिचय दिया। पहले दिन कुल 208 विद्यार्थियों का पंजीयन हुआ।
प्रार्थना सभा, भोजन मंत्र एवं सामूहिक भोजन के दौरान विद्यार्थियों का अनुशासन आकर्षण का केंद्र बना रहा। आयोजन समिति द्वारा विद्यार्थियों के रहने, भोजन, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
शिविर प्रबंधक रमेश सोनी पुनासा ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों को संस्कार, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविर बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
द्वितीय दिवस की शुरुआत सुबह 5 बजे जागरण, योग, प्राणायाम एवं साधना के साथ हुई। लगभग 250 शिविरार्थियों ने अनुशासित पंक्तियों में बैठकर योगाभ्यास, ध्यान एवं वातावरण शुद्धि यज्ञ में भाग लिया।
उद्घाटन सत्र में महामण्डलेश्वर रविशरणानंद गिरी जी महाराज ने बच्चों को माता-पिता का सम्मान करने, समय का सदुपयोग करने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया। वहीं “आदर्श दिनचर्या एवं आदर्श बालक के गुण” विषय पर गणपतसिंह राजपुरोहित ने विद्यार्थियों को अनुशासन, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच का महत्व समझाया।
मौखिक अभिव्यक्ति सत्र में विद्यार्थियों ने कहानी, कविता, गीत और भाषण प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। वहीं शाम के सत्र में “सांस्कृतिक भारत का परिचय” विषय पर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं की महानता पर प्रकाश डाला गया।
शिविर में नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक विकास पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। व्यायाम, खेल, नियुद्ध एवं आत्मरक्षा जैसी गतिविधियों में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
रात्रिकालीन सत्र में भजन-कीर्तन एवं हास्य-विनोद कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और आनंदमय बना दिया। आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी युवाओं को सौंपी गई है, जिससे उनमें नेतृत्व क्षमता और सेवा भावना का विकास हो रहा है।
शिविर में सर्व समाज का सहयोग देखने को मिल रहा है। अभिभावकों ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में बच्चों को संस्कारों एवं संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे शिविर अत्यंत आवश्यक हैं।

